रसोई की सीटी से रेल के इंजन तक: प्रेशर कुकर के आविष्कार की अनोखी कहानी
जैसा की हम सभी जानते हैं कि जेम्स वाट (James Watt) ने प्रेशर कुकर की सीटी से प्रभावित हो कर एक ऐसा आधुनिक इंजन बनाया जिसने पूरी दुनिया में औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) ला दी। लेकिन क्या आप प्रेशर कुकर के अविष्कार की कहानी जानना चाहेंगें, तो आइए जानते हैं प्रेशर कुकर के अविष्कार की कहानी क्या है?
प्रेशर कुकर का आविष्कार डेनिस पैपिन (Denis Papin) ने 1679 में किया था। डेनिस पैपिन एक फ्रांसीसी (French) भौतिकविज्ञानी (Physicist) और गणितज्ञ थे। शुरुआत में उन्होंने इसका नाम "स्टीम डाइजेस्टर" (Steam Digester) रखा था। उस समय वैज्ञानिक इस बात पर रिसर्च कर रहे थे कि हवा और भाप (steam) का दबाव कैसे काम करता है। डेनिस पैपिन यह साबित करना चाहते थे कि यदि हम पानी और भाप को एक मजबूत, पूरी तरह बंद बर्तन में बंद कर दें, तो अंदर का दबाव (pressure) बढ़ जाता है। इस बढ़ते दबाव के कारण पानी का उबलने का तापमान (boiling point) भी बढ़ जाता है। यानी पानी 100 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा गर्म हो जाता है, जिससे खाना बहुत तेजी से पक सकता है। यह विशुद्ध रूप से एक वैज्ञानिक प्रयोग था। दूसरा उस जमाने में आम लोगों और सैनिकों के लिए भोजन की कमी एक बड़ी समस्या थी। पैपिन एक ऐसा उपकरण बनाना चाहते थे जो बेकार समझे जाने वाले भोजन को भी खाने योग्य बना सके। वह देखना चाहते थे कि क्या अत्यधिक ऊंचे तापमान और दबाव से जानवरों की सख्त हड्डियों को भी इतना मुलायम बनाया जा सकता है कि उनसे पोषण (जिलेटिन और शोरबा) निकाला जा सके। उनका यह प्रयोग बेहद सफल रहा। उनके स्टीम डाइजेस्टर ने हड्डियों को पूरी तरह से नर्म कर दिया, जिससे गरीबों के लिए सूथ और स्टॉक बनाना आसान हो गया। डेनिस पैपिन का मकसद सिर्फ रोजमर्रा का खाना जल्दी पकाना नहीं था, बल्कि विज्ञान के सिद्धांतों का उपयोग करके कम संसाधनों (जैसे हड्डियों और सख्त मांस) से ज्यादा से ज्यादा पोषण निकालना और भाप की शक्ति को दुनिया के सामने साबित करना था।
डेनिस पैपिन के इस "स्टीम डाइजेस्टर" से जुड़े कुछ बहुत ही दिलचस्प और मजेदार किस्से यहाँ दिए गए हैं।
1. शाही मेहमानों के सामने 'हड्डियों का हलवा'
1682 में, डेनिस पैपिन ने लंदन की सबसे प्रतिष्ठित विज्ञान संस्था, रॉयल सोसाइटी के वैज्ञानिकों और इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय (King Charles II) के लिए एक शाही दावत रखी। इस दावत में सारा खाना उनके नए आविष्कार (स्टीम डाइजेस्टर) में पकाया गया था। जब मेहमानों को खाना परोसा गया, तो वे हैरान रह गए। जो जानवरों की हड्डियाँ चबाने लायक भी नहीं होती थीं, वे कुकर के भारी दबाव के कारण इतनी नर्म और जेली जैसी हो चुकी थीं कि राजा और वैज्ञानिकों ने उन्हें बड़े चाव से खाया। इस दावत को इतिहास में "द फिलॉसॉफिकल सपर" (The Philosophical Supper) के नाम से जाना जाता है।
2. जब कुकर बन गया तो उसका पहला धमाका!
शुरुआत में जब पैपिन ने यह डिवाइस बनाया, तो इसमें कोई सेफ्टी वॉल्व नहीं था। एक प्रयोग के दौरान, भाप का दबाव इतना ज्यादा बढ़ गया कि वह लोहे का भारी बर्तन एक जोरदार धमाके के साथ फट गया। कमरे की खिड़कियां टूट गईं और दीवारें हिल गईं। इस खतरे को टालने के लिए पैपिन ने "सेफ्टी वाल्व" (Safety Valve) का आविष्कार किया। यह वही वाल्व है जो आज हमारे घरों के कुकर में 'सीटी' के रूप में काम करता है। जब अंदर का दबाव ज्यादा हो जाता है, तो यह वाल्व अतिरिक्त भाप को बाहर निकाल देता है।
3. रसोइयों का डर और 'जादू टोना'
जब यह आविष्कार पहली बार सामने आया, तो उस जमाने के आम रसोइये (Chefs) और लोग इससे बेहद डर गए थे। लोग सदियों से खुली आग पर खाना पकाते आ रहे थे। एक बंद लोहे के डिब्बे से अजीब सी आवाजें आना और अचानक सीटी से तेज भाप निकलना उन्हें किसी 'जादू-टोने' या भूतिया मशीन जैसा लगता था। कई रसोइयों ने तो इसे इस्तेमाल करने से साफ मना कर दिया था क्योंकि उन्हें डर था कि यह उनके किचन को उड़ा देगा।
आज जो ट्रेनें पटरियों पर दौड़ रही हैं, उनकी शुरुआत एक किचन के कुकर से हुई थी! जब वैज्ञानिकों ने देखा कि पैपिन के कुकर के अंदर की भाप में इतनी ताकत है कि वह भारी-भरकम ढक्कन और वजन को भी ऊपर उठा देती है, तो थॉमस न्यूकॉमेन और जेम्स वाट जैसे वैज्ञानिकों को एक नया विचार आया। उन्होंने सोचा, "अगर यह भाप एक ढक्कन उठा सकती है, तो यह एक बड़ा पहिया या पिस्टन भी घुमा सकती है!" इसी सोच ने आगे चलकर दुनिया के पहले भाप के इंजन (Steam Engine) को जन्म दिया। एक छोटा सा प्रयोग जो किचन में खाना जल्दी पकाने के लिए शुरू हुआ था, उसने न सिर्फ दुनिया का खान-पान बदला, बल्कि पूरी औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) की नींव रख दी। 1713 के आसपास पैपिन का लंदन में निधन हो गया। जिनका आविष्कार (प्रेशर कुकर) आज दुनिया के हर घर की रसोई में मौजूद है, और जिनके सिद्धांतों ने पूरी दुनिया को ट्रेनों और फैक्ट्रियों का 'भाप इंजन' दिया।
सुशी सक्सेना
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